बिखरे मोती

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arungupta


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मैं हिन्दू हूँ

Posted On: 7 Mar, 2016  
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Junction Forum social issues पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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क्या शहीद भगत सिंह नास्तिक थे ?

Posted On: 10 Jan, 2016  
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Junction Forum Others Politics में

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बचत

Posted On: 25 Dec, 2015  
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Hindi Sahitya Others मस्ती मालगाड़ी में

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जय श्री राम कांग्रेस ने शुरू से मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति अपनाई क्योंकि नेहरु जी के बाबा एक मुसलमान थे.उनकी कश्मीर नीति से आज देश भुगत रहा उनमे स्वाभिमान की बहुत कमी थी इसीलिए मुस्लिम आक्रमंकरियो द्वारा तोड़े गए मंदिरों का जीर्णोधार सोमनाथ मंदिर की तर्ज़ पर होना चाइये था.नेहरु घमंडी थे और जब कांग्रेस ले लोगो ने पटेलजी को अध्यक्ष बनाया नेहरूजी ने गाँधी जी को ब्लैकमेल करके प्रधान मंत्री बन गए और देश का दुर्भाग्य शुरू हो गया.कांग्रेस ने सत्ता के लिए आपतिकाल लगाया और दंगे की राजनीती करके सत्ता सुख भोग सोनिया ने कांग्रेस को बर्बाद दिया,प्रधानमंत्री का पद की गरिमा गिरा दी थी.अब बिहार में लालू की गोद में बैठ गयी और देश को खूब लूटने दिया और लूटा अब कांग्रेस की वापसी असंभव है.सुन्दर विश्लेषण के लिए आभार .

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

कांग्रेस दल के पतन के जो कारण आपने बताए हैं अरुण जी, वे बिलकुल सही हैं । मेरा यह मानना है कि जिन आदर्शों तथा मूल्यों को लेकर इस दल ने स्वाधीनता आंदोलन का नेतृत्व किया था, उनसे मुंह मोड़कर सत्ता के दुरुपयोग में लिप्त हो जाने से यह दल अंततः सत्ता ही खो बैठा । जनता की और स्वयं अपनी भी दृष्टि में उठने के लिए इसे स्थानीय नेतृत्व को विकसित करना होगा तथा अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा । सत्ताधारी दल तथा प्रधानमंत्री प्रचार-तंत्र के कुशल उपयोग में कांग्रेस से बहुत आगे हैं । उन्होंने विगत सरकार के सभी अच्छे कार्यों को पार्श्व में डालकर केवल उसके बुरे कार्यों को ही जनता के समक्ष बढ़ा-चढ़कर प्रस्तुत किया और इस दल और इसके नेतृत्व को इतना बदनाम कर दिया कि अब इसके नेतृत्वकर्ताओं की सच्ची बातें भी जनता को झूठी लगती हैं । प्रचार और विपणन में यह दल अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी तथा वर्तमान प्रधानमंत्री की समता कभी नहीं कर सकता । अतः उनका अनुसरण न करके इसे अपना मार्ग स्वयं तलाशना होगा । प्रशांत किशोर जैसे किसी व्यक्ति को लाना भी व्यर्थ ही है जब दल अपनी राजनीतिक भूमि ही गंवा चुका है । इसकी छवि तभी सुधरेगी जब यह अपने मूल आदर्शों की ओर पुनः उन्मुख होगा । राज्यों में नेतृत्व हेतु नवीन युवा रक्त को अवसर देना होगा । जनता से पुनः जुड़ने के लिए जनाकांक्षाओं को भली-भांति समझकर अत्यंत परिश्रम करना होगा । उत्तर प्रदेश तथा बिहार में दल की ऐसी दुर्दशा का कारण यह रहा है कि प्रथम पराजय के उपरांत इस दल ने जनता का विश्वास पुनः प्राप्त करने के लिए प्रयास करना ही छोड़ दिया तथा जनता को जात-पांत की राजनीति करने वाले क्षेत्रीय दलों की मनमानी के हवाले कर दिया । अब तो जनता की दृष्टि में विश्वसनीय बनने के लिए भागीरथ प्रयत्न करना होगा । यह लक्ष्य हिमालय पर्वत चढ़ने के समान कठिन तो है लेकिन असंभव नहीं ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

जय श्री राम अरुणजी आपके लेख के लिए धन्यवाद्.उत्तर प्रदेश में जाति अगले पिछड़े और मुस्लिम के नाम पर वोट मांग कर समाज का बटवारा कर लेते बिहार में क्या हुआ इतने सालो तक गुंडागर्दी लूत्माल करने वाले लालू जो सजा आफता है चुनाव में सबसे बड़ा दल बन जाता ये लिक्तंत्र पर कलंक हो पिछले ७० सालो से मुसलमानों को बीजेपी आरएसएस के नाम पर डरा कर वोट लेने वाले डालो के साथ हिन्दू कार्ड खेलना बहुत ज़रूरी है किसानो के लिए नई योजना आई ७० साल की गन्दगी को २ साल में दूर करना मुस्किल है लेकिन बहुत काम हो रहा यदि शहर विकसित होंगे गावो की स्थित टीक होगी बीजेपी जैसे मौर्या को अध्यक्ष बनाया ऐसे ही कोइ चेहरा लायेगी योगी आदित्यनाथ बहुत अच्छे होंगे.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

जय श्री राम अरुण जी मोदी जी की सरकार ने २ साल में बहुत से कार्य किये बजट में किसानो दलितों के लिए विशेष ध्यान दिया देश में आज एक ही मुद्दा रह गया मोदी विरोध इसीलिये लालू नितीश कांग्रेस एक जुट हो जाते आपने इन सेक्युलर ब्रिगेड के लिए एक भी शब्द निंदा का नहीं कहा जो विश्वविद्यालय में राष्ट्र विरोध का समर्थन करते ज़हरी भाषा बीजेपी से ज्यादा सेक्युलर ब्रिगेड के नेता बोलते मुस्लिम मारे जाते मीडिया सेक्युलर ब्रिगेड हल्ला मचाता परन्तु हिन्दुओ के मारे जाने पर सब चुप आपके विश्लेषण से कुछ हद तक सहमत है असम में बीजेपी जीत मिलेगी लेकिन केरल बंगाल में कुछ सीट्स ज्यादा आयेंगी ऐसी उम्मीद है तमिल नाडू केरला बंगाल में क्षेत्रीय दल शुरू से मजबूत है कांग्रेस तो डीएम के  से और वाम दलो से गठबंधन कर के सिधान्हीनता की हद पार कर दी आपको सेक्युलर नेताओ केजरीवाल,नितीश,लालू ममता के बारे में कहना चाइये था जो कुर्सी के लिए देश भी बेच दे.लेख के लिए आभार और बधाई .होली की शुभकामनाओ के साथ.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

आ० अमित जी , विस्तार दो तरह से होता है एक लोगो के बीच पैठ बना कर पार्टी का विस्तार किया जाताहै और दूसरा अन्यों की अक्षमता का फायदा उठा कर सीटों में विस्तार किया जाता है I पहला विस्तार स्थाई होता जबकि दूसरा एक या अधिक से अधिक दो इलेक्शन तक ही चल पाता हैI मैं स्थाई विस्तार की बात में विशवास करता हूँ I असम और हरियाणा बीजेपी के लिए दूसरी श्रेणी के विस्तार का परिणाम है I जहां तक जम्मू कश्मीर की राजनीति की बात है वो शेष भारत की राजनीति से कुछ भिन्न है I जम्मू क्षेत्र में अधिकाँश हिन्दुओं ने बीजेपी को इसलिए वोट दिया कि शायद हिन्दुओं की वापसी कश्मीर घाटी में हो सके जो कांग्रेस कराने में बिलकुल असफल रही I अपने दो साल के शासन काल में बीजेपी भी इस मुद्दे पर अभी तक कुछ भी कर पाने में सफल नहीं हुई है I देखना है अब शेष तीन वर्षों में क्या होगा ...आभार !

के द्वारा: arungupta arungupta

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