बिखरे मोती

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यूपी में मुख्य राजनीतिक दल: एक अवलोकन (भाग-2)

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यूपी में मुख्य राजनीतिक दल: एक अवलोकन (भाग-2)

इस लेख के भाग -1 में बसपा की वर्तमान स्थिति का  आकलन  किया  गया थाI लेख के इस भाग में हम सपा की वर्तमान स्थिति का आकलन करेंगेI

सपा वर्तमान में प्रदेश की एक सबसे बड़ी पार्टी है और प्रदेश की सत्ता भी इसके हाथ में ही हैI कहने के लिए तो यह पार्टी अपने को समाजवाद का समर्थक मानती है तथा स्व० लोहिया जी को अपना मार्गदर्शक मानने का दावा करती है लेकिन कोई भी सामान्य समझ का व्यक्ति पार्टी की इस बात से बिल्कुल भी सहमत नहीं होगाI इसका कारण है इस पार्टी पर केवल एक ही परिवार का एकक्षत्र राज्य है जो समाजवाद की विचारधारा के एकदम विपरीत हैI जिस परिवार के लगभग ग्यारह सदस्य देश की या राज्य की विभिन्न सदनों के सदस्य है उस परिवार का समाजवाद का दम भरना केवल एक धोखाधड़ी ही कहा जाएगाI वैसे लोकतंत्र में कहा जाता है कि जनता सब देखती है लेकिन इस तथ्य को जनता क्यों नहीं देख पा रही है जनता की लोकतंत्र में वोट करने की काबिलीयत पर भी सवाल खड़े करता हैI

इस पार्टी की वोटों का एक मुख्य आधार मुस्लिम समुदाय हैI इसके मुख्य दो कारण है I पहला कारण – यह पार्टी प्रदेश के मुसलिम समुदाय को यह विश्वास दिलाने में सफल रही है कि प्रदेश में उसकी सुरक्षा और उन्नति की गारंटी केवल यह पार्टी ही दे सकती है यानी वही पुरानी बंटवारे की राजनीतिI दूसरा कारण – मुसलिम समुदाय में कोई भी ऐसा राजनीतिक चेहरे का न होना जो अपने  निज स्वार्थ से ऊपर उठ कर मुस्लिमों के उत्थान की सोचेI इस बंटवारे की राजनीति का फायदा इस पार्टी को भरपूर मिलाI लेकिन पिछले दिनों प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हुए साम्प्रदायिक दंगों ने मुस्लिम समुदाय को यह सोचने पर मजबूर किया है कि जैसा यह पार्टी कहती है वास्तव में वैसा है नहींI इस पार्टी के शासन काल में मुसलिम समुदाय की आर्थिक और शिक्षा की स्थिति में बहुत सुधार हुआ है ऐसा कहने का भी कोई बहुत मजबूत आधार नहीं हैI इस समुदाय में शिक्षा के प्रसार का अनुमान केवल इस बात से ही लगाया जा सकता है कि प्रदेश के अच्छे स्कूलों में पढ़ने वाले मुसलिम समुदाय के बच्चे का प्रतिशत अन्य समुदाय के बच्चों की तुलना में मुश्किल से चार से पाँच प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगाI यद्यपि अनुमान लगाने का यह कोई विश्वसनीय तरीका नहीं है लेकिन फिर भी प्रदेश में मुसलिम समुदाय में अच्छी शिक्षा के प्रसार की स्थिति भली प्रकार दर्शाता हैI इस समुदाय की आर्थिक स्थिति का आकलन भी बड़ी आसानी से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले मुसलिम समुदाय के मोहल्लों की हालत देख कर सहज लगाया जा सकता हैI यद्यपि सपा कुछ हद तक पिछड़े वर्ग की वोटों पर भी निर्भर रहती है लेकिन पार्टी में केवल यादवों को छोड़ कर पिछड़े वर्ग का कोई भी स्पष्ट चेहरा नहीं है इसीलिए इस वर्ग की वोटों का अन्य दलों में बंट जाने का पूरा अंदेशा हैI

पिछले चार वर्षों में जिस तरह से राज्य का विकास हुआ है उसे बहुत उत्साहवर्धक नहीं कहा जा सकताI राज्य में ऊर्जा की हालत विशेषकर बिजली की जैसी चार वर्ष पूर्व थी कमोबेश वैसी आज भी हैI किसी भी बड़े उद्योग घराने का राज्य में नए उद्योग लगाने के लिए आगे न आना निश्चित ही राज्य सरकार की कमियों की इंगित करता है I राज्यों में किसी भी नए उद्योग की स्थापना से पहले हर पूंजीपति  इन सुविधाओं की तरफ जो किसी भी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है ध्यान देता है : सस्ती बिजली और उचित मात्रा में इसकी उपलब्धता, उद्योग के लिए एक सुरक्षित और स्थिर वातावरण, ट्रेंड मैन पावर, आने जाने के उचित सड़कें व् अन्य साधन तथा राज्य सरकार की इन उद्योगों को पूर्ण रूप से सहायता देने की कटिबद्धताI यदि ये सुविधाएं राज्य में उपलब्ध नहीं है तो कोई भी उद्योगपति अपने उद्योग को उस राज्य में लगाने का साहस नहीं करेगाI पिछले चार वर्षों में किसी भी बड़े उद्योग का राज्य में न आना इस बात को दर्शाता है कि राज्य सरकार इन वर्षों में उपरोक्त विषयों पर कुछ भी करने में लगभग असफल रही हैI जब राज्य में नए उद्योग नहीं आयेंगे तो यह भी निश्चित है कि रोजगार के अवसर भी ज्यादा नहीं होंगेI पड़ेगाI

अभी हाल की घटनाओं से पार्टी के अंतरकलह भी उभर  कर  सामने  आने  लगी हैंI

सब मिलाकर पार्टी की चार वर्षों में कोई ऐसी विशेष उपलब्धि नहीं है जिसके  आधार पर जनता इस पार्टी को अपना वोट देने पर विचार  कर सकेI



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
June 27, 2016

जय श्री राम अरुणजी आपने बहुत सटीक व्याख्या की मथुरा,कैराना की घटनाओ ने और प्रतिष्ट कम कर दी ये दल न तो समाजवाद में न लोकतंत्र में बस गद्दी मिलनी चाइये इसके अलावा बहुत अवसरवादी जितना मौका मिला मिल जाती ऐसे में यदि जीतती तो बहुत शर्मनाक होगा मुस्लिमो और हिन्दू के साथ मुआवजा देने में भी भेदभाव करती मुसलमानों को बहुत ज्यादा हिन्दुओ को कम,इससे और आज़म खान की वजह से हिन्दू भी नाराज़ है.


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