बिखरे मोती

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बस यूँ ही एक सोच - दिल्ली की राजनीति

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दिल्ली विधान सभा के इक्कीस सदस्यों को लेकर आजकल टीवी चैनलों पर और अन्य राजनीतिक मंचों पर चर्चाएँ आम हैंI राजनीति में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति का पूरा ध्यान चुनाव आयोग पर ही केन्द्रित हैI यदि दिल्ली विधान सभा के आम आदमी पार्टी के इक्कीस विधायकों की सदस्यता रद्द कर दी जाती है जहां अन्य राज्यों में इसी मुद्दे को लेकर राजनीति गरमाएगी वहीं दिल्ली में इसके निम्न परिणाम हो सकते हैं / होंगें   :-

1 ) एक साधारण गणित के चलते आम आदमी पार्टी की सदस्यों की संख्या वर्तमान विधान सभा में 48 (69 – 21) हो जाएगी जो कुल सदस्यों की संख्या का 2/3 होगी जिसके चलते आम आदमी पार्टी सरकार दिल्ली में पूर्ण बहुमत में होगीI

2 ) 21 सदस्यों की सदस्यता रद्द होते ही दिल्ली में इन सीटों के लिए उपचुनाव होगाI यह उपचुनाव मुख्यतः तीन पार्टियों के बीच ही होगा बीजेपी , कांग्रेस और आम आदमी पार्टीI इस उपचुनाव के निम्न परिणाम हो सकते हैं

क ) पहला विकल्प – यदि कांग्रेस पार्टी सारी की सारी सीटें जीत जाती हैI यदि ऐसा होता है तो इस का सबसे ज्यादा नुकसान बीजेपी को अगले वर्ष होने वाले कई राज्यों के चुनावों में होगा जबकि आम आदमी पार्टी  को केवल पंजाब के चुनावों में ही बड़ा नुकसान होगा जहाँ उसे काफी आशाएं हैI यह जीत कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के लिए अगले वर्ष होने वाले राज्यों के चुनावों में  हौसला बढ़ाने वाली भी सिद्ध होगीI

ख ) दूसरा विकल्प – यदि बीजेपी सारी की सारी सीटें जीत जाती हैI यदि ऐसा हुआ तो यह कांग्रेस और आप के लिए यह बहुत ही घातक होगाI इस दशा में हो सकता है कांग्रेस का अस्तित्व ही खतरे में पड़  जाएI आम आदमी पार्टी के लिए  भी यह बहुत ही घातक होगाI इस धक्के से उभरने में शायद उसे कई वर्ष लग जाएंI देश की राजनीति को कांग्रेस के विलुप्त होने से ज्यादा खतरा है न कि आम आदमी पार्टी के  क्योंकि इस दशा में राष्ट्रीय स्तर पर लोगों के सामने बीजेपी के अलावा कोई और विकल्प नहीं होगा और यह देश में प्रजातंत्र के भविष्य के बहुत ही नुकसानदेह साबित हो सकता हैI

ग ) तीसरा विकल्प – यदि आम आदमी पार्टी फिर से सारी की सारी सीटें जीत जाती हैI जहां एक ओर यह स्थिति आम आदमी के लिए बहुत ही लाभप्रद सिद्ध होगी वहीं दूसरी ओर यह स्थिति इसके नेताओं में एक दंभ प्रवृति को भी जन्म दे सकती है जो इस पार्टी के भविष्य के लिए बेहद घातक सिद्ध हो सकती  हैI यह विकल्प बीजेपी और कांग्रेस के लिए बहुत ही घातक सिद्ध होगाI अपनी इस जीत के बलबूते आम आदमी पार्टी अगले वर्ष होने वाले राज्यों के चुनावों में बहुत बड़ा फेर बदल कर एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में उभर कर सामने आ सकती है और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेसी का विकल्प बन सकती हैI

घ ) चौथा विकल्प – यदि तीनों पार्टियां कुछ-कुछ सीटों पर अपनी जीत दर्ज कराती हैI इस दशा में सीटों के आधार पर बड़ा नुकसान तो आम आदमी पार्टी को ही होगा लेकिन अन्य शेष दो पार्टियों को भी कोई विशेष लाभ नहीं होगाI आम आदमी पार्टी अपनी स्थिति को यह कहकर साफ़ कर सकती है कि देश की दो बड़ी पार्टियों के दुष्प्रचार के बाद भी उसने कुछ सीटों पर जीत दर्ज की है और यह उसके लिए एक बड़ी उपलब्धि है I यदि  बीजेपी  कुछ सीट जीत जाती है तो उसके नेताओं का लगातार यह  कहना कि दिल्ली में आप सरकार कुछ भी काम नहीं कर  रही झूठा  साबित होगा जिसका नुकसान पार्टी को  अगले वर्ष होने वाले राज्यों के चुनावों में झेलना पड़ेगाI दूसरी ओर कांग्रेस जो एक राष्ट्रव्यापी पार्टी के रूप में देश पर लगभग 60 वर्षों तक शासन करती रही यदि अपनी कुछ सीटों की जीत को जोर शोर से प्रचारित करती है तो उसके लिए यह बहुत ही शर्म की बात होगीI वैसे आजकल देश में राजनीति के क्षेत्र में शर्म के लिए कोई स्थान शायद  हे बचा हैI

परिणाम ( घ ) जिसके घटने की प्रायक्ता सबसे अधिक है  के फलस्वरूप कुछ और महत्वपूर्ण बातें भी हो सकती हैंI जैसे आम आदमी पार्टी को झटका लगाने से इसके नेता शायद भविष्य में बेतुके निर्णय लेने से बचेंगेंI दूसरी ओर बीजेपी और कांग्रेस के जीते विधायकों को आम आदमी पार्टी के विधायकों सामने अपने आपको सिद्ध करने की एक बड़ी चुनौती होगी जिसमें उन्हें आम आदमी पार्टी सरकार का सहयोग कम ही मिलेगाI सब मिलाकर यह स्थिति दिल्ली वासियों के लिए लाभप्रद ही होगीI



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