बिखरे मोती

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स्यापा

Posted On: 20 Mar, 2017 हास्य व्यंग में

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लेखक : अरुण गुप्ता

क्या आपने देखा है किसी घर में जश्न और स्यापा एक साथ हो ? नहीं न ! लेकिन हमारे घर में आजकल ऐसा ही है I हमारे घर में जहां एक तरफ जश्न मन रहा है वहीं दूसरी तरफ फकत स्यापा ही स्यापा है I चुनाव के नतीजे आने के एक दिन पहले बेगम ने हमें कहा, “ मियाँ , बाजार जाकर कुछ मिठाई विठाई ले आइये , होली में बस दो ही दिन बचे है I घर में मेहमानों के लिए कुछ तो होना ही चाहिए I”
लेकिन हमें क्या पता था कि ये मिठाइयां ही हमारे लिए जहर बन जायेंगी I बेगम का फरमान सुनते ही हम भी बस फागुनी मस्ती में बाज़ार जा पहुँचे और चुन-चुन कर मिठाइयों की खरीदारी की I जब हम बाज़ार से घर लौटे तो टीवी चैनलों पर एग्जिट पोल के नतीजे आ रहे थे I सब चैनल वाले दिखा रहे थे कि इस बार कांटे की टक्कर है I ये कहना मुश्किल है कि किसकी सरकार बनेगी I
बेगम साहिबा एग्जिट पोल के नतीजों को बड़े ध्यान से देखते हुए अपना पसंदीदा गाना ‘हवा में उड़ता जाए मोरा लाल दुपट्टा मलमल का’ गुनगुना रही थी I बेगम को इस तरह गुनगुनाते देख कर हमारे दिमाग की घंटियाँ बज उठी I बेगम ये गाना उसी वक्त गुनगुनाती है जब वो किसी बात को लेकर पूरी तरह से मुतमईन होती हैं I अपने वालों की जीत को लेकर मुतमईन तो हम भी थे इसीलिए हमने बेगम के गाना गुनगुनाने की तरफ कोई ख़ास तवज्जोह नहीं दी और बस यहीं हम गच्चा खा गए I
चुनाव के नतीजे वाले दिन हम आराम से दस बजे सोकर उठे क्योंकि हमें पूरा यकीन था कि सरकार तो अपने वालो की ही बनने वाली है इसीलिए खबरें देर से भी सुन लेंगे तो क्या फर्क पडेगा I बिस्तर से उठकर हम खरामा –खरामा खाने की मेज पर आकर बैठ गए I लेकिन मेज़ पर सजे पकवानों और मिठाइयों को देख कर हमारा माथा ठनका I हमने अपने दिमाग पर जोर डाला लेकिन हमें आज किसी भी त्यौहार के होने की बात याद नहीं आई और न ही आज कोई मेहमान हमारे यहाँ नाश्ते पर आने वाला था I हम अभी मेज पर सजी पकवानों की किश्तियों की पहेली को सुलझाने की कोशिश ही कर रहे थे , बेगम ने मिठाई की एक किश्ती मेज से उठाकर हमारी ओर बढ़ाते हुए कहा, “ लो मियाँ ये मिठाई खाओ I” मिठाई की तरफ हाथ बढ़ाते हुए हमने सवालिया नज़रों से बेगम की तरफ देखा I
हमारी नज़रों के सवाल को नज़रों से ही ताड़ कर बेगम बोली, “ मियाँ खा भी लो, आज तो हमारा ही दिन है I”
बेगम के इतना कहते ही हम ने मिठाई की किश्ती की तरफ बढ़े अपने हाथ को फौरन ही वापस खींच लिया और उठकर टीवी को चालू कर दिया I टीवी पर चलने वाली ख़बरों को देखकर एक बार तो हमारी आँखों के सामने अँधेरा सा छा गया I लेकिन जो सामने था उसे झुठलाया भी तो नहीं जा सकता था I मन तो हुआ कि जाकर अपने वाले दोनों लौंडों का टेंटुआ दबा दें I दोनों नामाकूलों ने मिलकर एक दम से नाक कटा दी I लेकिन आपको तो पता है हम वोटरों के हाथ की पहुँच बस वोट डालने के दिन वोटिंग मशीन तक ही होती है ; उसके बाद तो बस खुदा ही मालिक होता है I इधर बेगम लगातार मुस्करा कर और इतरा-इतरा कर मिठाइयों की किश्तियाँ हमारी तरफ बढ़ा रही थी और उधर हमारे दिल पर सांप लौट रहे थे I वो तो शुक्र मनाइए हमारी शुगर की बीमारी का जिसने हमारी इज्जत रख ली I बढ़ी शुगर की आड़ लेकर बेगम द्वारा हमें नोश फरमाई गयी मिठाइयों को हमने खाने से मना कर दिया I लेकिन बेगम कहाँ मानने वाली थी बार-बार हमारे सामने मिठाइयों की किश्तियाँ लाकर हमारे जख्मों पर नमक छिड़कती जा रही थी I हम मजबूर थे बस चुपचाप अपने जख्मों को सहलाते हुए दिल ही दिल में दुआ कर रहे थे कि खुदा इतने बुरे दिन दुश्मन को भी न दिखाए I
वैसे सात साल बाद तो घूरे के दिन भी बदलते है बस आज एक इसी कहावत का सहारा था I आप भी हमारे दिल के सुकून के लिए खुदा से दुआ करिए कि वो हमें इस दुःख को सहने की ताकत दे I अभी तो हम बस दिल ही दिल में गा रहे हैं कि दिल के अरमान आंसुओं में बह गए I
लेकिन छोड़िये हमारे इन आंसुओं को I ये कमबख्त तो ख़ुशी में भी बहते है और गम में भी I वैसे हम इतने अहमक भी नहीं हैं जो अपने सदमे के चलते होली के इस मुबारक मौके पर आप सबको मुबारकवाद देना ही भूल जाए I आप सबको होली बहुत मुबारक हो I हार और जीत तो एक ही सिक्के के दो पहलू है I कल एक नया सूरज फिर निकलेगा बस इसी उम्मीद में I



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